सोमवार, 1 अप्रैल 2013

मानव से तो प्यार करो रे .................


हो मानव जब तुम मानव से तो प्यार करो रे !

निराश ह्रदय में आशा का संचार करो रे !!


कातर स्वर कितने नित्य तुम्हें पुकार रहे है !

पीड़ा से अपनी निश -दिन वे चीत्कार रहे है !!

बन पीड़ा हर सब पीड़ित जनों के त्रास हरो रे !

निराश ह्रदय में आशा का संचार करो रे !! 1


कितनी ही श्वासें गर्भों में दम तोड़ रही है !

कलिया कितनी ही खिले बिन चटक रही है !!

मानव हो तो दानव सा मत काम करो रे !

निराश ह्रदय में आशा का संचार करो रे !!2



तरुणाई कितनी लक्ष्य हीन हो भटक रही है !

माताएं कितनी वृद्धाश्रम में तड़प रही है !!

मझधार में डूबती नैया की पतवार बनो रे !

निराश हृदय में आशा का संचार करो रे !!3



हो मानव जब तुम मानव मन की थाह गहो रे !

क्षमा दया तप त्याग की मिसाल बनो रे !!

अब मानवता हित तेजी से हुंकार भरो रे !

निराश ह्रदय में आशा का संचार करो रे !!4

दीपिका "दीप''

1 टिप्पणी:

  1. सर्वप्रथम ब्लोगर की दुनिया में आपका स्वागत है
    सुंदर ब्लॉग की बधाई
    सुंदर रचनाओं का संकलन है
    पुनः बधाई

    आप अपने ब्लॉग में "इस साईट पर शामिल हों"का
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    आग्रह है मेरे ब्लॉग में सम्मिल हो,इस साईट पर क्लिक करें

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